मुंबई, 8 मार्च 2026: “आर्बोरिकल्चर के माध्यम से वृक्षों का वैज्ञानिक संरक्षण संभव है। जलवायु परिवर्तन के महासंकट से बचने के लिए वृक्षों के अलावा कोई विकल्प नहीं है। शहरों के सतत हरित विकास के जरिये सामाजिक न्याय का अधिकार स्थापित किया जाना चाहिए” — यह आह्वान संयुक्त राष्ट्र की सद्भावना दूत एवं अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा ने किया।

दिया मिर्ज़ा ‘ग्रोइंग सिटीज, ग्रीनर कैनोपीज़’ विषय पर आधारित दूसरी अंतरराष्ट्रीय आर्बोरिकल्चर परिषद (वृक्षवर्धन 2026) के दूसरे दिन मुंबई के होटल सहारा में बोल रही थीं। इस परिषद का संयुक्त आयोजन अमेनिटी ट्री केयर एसोसिएशन (ATCA) और नानाजी देशमुख प्रतिष्ठान ने किया है।
इस अवसर पर ATCA के निदेशक वैभव राजे, निदेशक नकुल सावनी, नानाजी देशमुख प्रतिष्ठान के CEO आर्यन पांडे एवं अध्यक्ष संजय पांडे उपस्थित थे।
परिषद के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दिया मिर्ज़ा ने सर्वप्रथम सभी को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा, “वैभव राजे देश के एकमात्र सर्टिफाइड आर्बोरिकल्चरिस्ट हैं और मुझे उनसे हमेशा नई-नई जानकारियां मिलती रही हैं। मेरा बचपन हैदराबाद में प्रकृति के सानिध्य में बीता। आधुनिक नगरीय विकास हरियाली और प्रकृति से रहित होता जा रहा है। इसीलिए जापान जैसे देशों में अवसाद से पीड़ित लोगों के उपचार के लिए फॉरेस्ट थेरेपी का उपयोग किया जाता है — जंगल में जाकर प्रकृति का अनुभव लिया जाता है।”
प्रकृति के साथ अपने निजी अनुभव साझा करते हुए दिया मिर्ज़ा ने कहा, “मेरे बेटे की स्कूल एक अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में है — वहाँ प्रकृति का नामोनिशान नहीं है। लेकिन मेरे घर की बालकनी में एक छोटा-सा जंगल तैयार हो गया है, जिसके जरिये नई पीढ़ी प्रकृति को समझने की कोशिश कर रही है।”

“अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध चल रहे हैं, ऐसे में अपने ही आसपास 45,000 मैंग्रोव का कटना मन को बहुत दुःख देता है। हम कभी पेड़ों से संवाद करने की कोशिश नहीं करते। लेकिन वृक्ष संवाद करते हैं।”
जलवायु परिवर्तन के संकट पर टिप्पणी करते हुए दिया मिर्ज़ा ने बढ़ते तापमान, हीट स्ट्रेस और बेमौसम बारिश को प्राकृतिक संतुलन के बिगड़ने के संकेत बताया। हीट आइलैंड इफेक्ट के कारण शहरी नागरिकों को साढ़े चार घंटे की भी भरपूर नींद मिलना मुश्किल हो गया है। नींद मानव स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। “आपकी प्रगति, शांति और संतोष — यह सब प्रकृति के संतुलन से ही मिलेगा, और यही सच्चा सामाजिक न्याय है,” उन्होंने जोर देकर कहा।

प्रकृति विरोधी लोग कौन हैं? — यह सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का प्रकृति से कोई नाता नहीं है, उन्हें प्रकृति का मूल्य पता नहीं। थोड़े से लाभ के लिए ये लालची लोग प्रकृति का नुकसान कर रहे हैं।
“एक कलाकार और जागरूक नागरिक के रूप में आर्बोरिकल्चर के माध्यम से वृक्ष संरक्षण का कार्य करने वाले वैभव राजे को मेरा पूरा समर्थन है। इस आंदोलन के जरिये हम स्वच्छ, सुंदर और संतुलित विकास के अनुकूल हरे-भरे शहर बनाएंगे और प्रकृति के साथ जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त करेंगे,” — इन शब्दों के साथ दिया मिर्ज़ा ने अपनी बात समाप्त की।
इस अवसर पर उन्होंने परिषद के साथ-साथ आयोजित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, प्रदर्शकों से संवाद किया और परिषद के चल रहे सत्रों में भी सहभागिता दर्शाई।
आर्बोरिकल्चर परिषद के निमित्त आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन करतीं अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा।


